UPI के 10 साल: एक छोटे से पेमेंट ऐप से 2,300 करोड़ मासिक ट्रांज़ैक्शन तक का अविश्वसनीय सफ़र

UPI ने 10 साल में 13,000 गुना ग्रोथ की! जानिए कैसे यह साधारण पेमेंट सिस्टम दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्क बन गया।

वित्त (FINANCE)

9/16/20261 मिनट पढ़ें

सोचिए — 2016 में जब किसी को पैसे भेजने होते थे, तो IFSC कोड ढूंढना, नेट बैंकिंग लॉगिन करना, और फिर 12-24 घंटे इंतज़ार करना पड़ता था। आज एक QR कोड स्कैन करो, और पल भर में पैसे पहुँच जाते हैं — चाहे सब्ज़ीवाले को हो, या घर बैठे किसी दोस्त को। यह बदलाव एक बड़े सपने का नतीजा है जिसका नाम है UPI — Unified Payments Interface।

UPI को 11 अप्रैल 2016 को NPCI (National Payments Corporation of India) ने RBI की देखरेख में लॉन्च किया था। उस वक़्त किसने सोचा था कि यह एक दशक में दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन जाएगा? आज जब UPI अपने 10 साल पूरे कर चुका है, तो यह सफ़र देखना सच में रोमांचक है।

शुरुआत कैसे हुई — और जियो-नोटबंदी ने कैसे बदल दी तस्वीर

शुरुआत में UPI केवल 21 बैंकों के साथ पायलट के तौर पर शुरू हुआ और 25 अगस्त 2016 को आम लोगों के लिए खुला। अगस्त 2016 में सिर्फ 93,000 ट्रांज़ैक्शन हुए थे, जो दिसंबर तक 19.9 लाख तक पहुँच गए।

लेकिन असली धमाका तब हुआ जब नवंबर 2016 में नोटबंदी आई। ₹500 और ₹1,000 के नोट बंद होने से लोगों को किसनोटबंदी ने UPI को अपनाने पर मजबूर कर दिया। 2016 की नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांज़ैक्शन की तरफ एक बड़ा बदलाव आया, और UPI एक सुविधाजनक विकल्प बनकर उभरा क्योंकि यह बिना कार्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर के मोबाइल फोन से तुरंत पैसे ट्रांसफर करने की सुविधा देता था। Jio के 4G के सस्ते डेटा प्लान ने इस आग में घी का काम किया — छोटे शहरों और गाँवों तक स्मार्टफोन पहुँचे, और UPI के यूज़र्स की संख्या तेज़ी से बढ़ी।

QR कोड क्रांति — जब चाय की दुकान भी डिजिटल हो गई

2018 तक UPI पीयर-टू-पीयर ट्रांसफर से आगे निकल गया और मर्चेंट पेमेंट बदलने लगा। QR कोड भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति का पहचान-चिह्न बन गया। छोटे व्यवसायों, स्ट्रीट वेंडर्स और मुहल्ले की दुकानों ने डिजिटल पेमेंट अपनाया क्योंकि QR कोड में न्यूनतम निवेश की ज़रूरत थी।

फिर आया COVID-19 का दौर। 2020-21 में जब लोग cash छूने से भी डरते थे, UPI एक ज़रूरत बन गया। अक्टूबर 2020 में UPI ने पहली बार एक महीने में 2 अरब ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए, और 2 अरब से 3 अरब का सफ़र सिर्फ 10 महीनों में तय हुआ।

आज हालत यह है कि P2M यानी दुकानदार को पेमेंट में 86% ट्रांज़ैक्शन ₹500 से कम के हैं — यही दिखाता है कि UPI रोज़मर्रा की छोटी-छोटी ख़रीदारी में कितनी गहराई से घुस चुका है।

आज के आंकड़े — जो दुनिया को चौंकाते हैं

अब ज़रा असली तस्वीर देखते हैं जो बताती है कि UPI का सफ़र कितना शानदार रहा है।

वार्षिक UPI ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम 2016-17 के 1.78करोड़ के आंकड़े से आगे बढ़ते हुए, सालाना ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम FY 2016-17 के महज़ 2 करोड़ से बढ़कर FY 2025-26 में 24,162 करोड़ तक पहुँच गया — यानी लगभग 12,000 गुना की उछाल। मासिक वॉल्यूम मई 2026 में 2,320 करोड़ (23.2 अरब) ट्रांज़ैक्शन के शिखर पर पहुँचा। आज 50 करोड़ से ज़्यादा लोग UPI इस्तेमाल करते हैं, और जून 2026 तक 731 बैंक UPI नेटवर्क पर लाइव हो चुके हैं।

सबसे बड़ी बात — UPI दुनिया के कुल रियल-टाइम पेमेंट वॉल्यूम का लगभग 49% अकेले संभालता है — अगले चार सबसे बड़े देशों को मिलाकर भी इतना नहीं होता। दूसरे नंबर पर ब्राज़ील का Pix है जिसकी हिस्सेदारी 14% है, उसके बाद थाईलैंड 8% और चीन 6% पर हैं।

दुनिया में UPI का झंडा — 'भारत में बना, दुनिया ने अपनाया'

UPI अब सिर्फ भारत की कहानी नहीं रही। 2026 तक UPI सिंगापुर, UAE, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, मॉरीशस, फ्रांस, कतर और ग्रीस में स्वीकार किया जा रहा है। जून 2026 में कंबोडिया नौवां देश बना जिसने NPCI इंटरनेशनल और ACLEDA बैंक की साझेदारी से UPI पेमेंट को अपनाया।

फ्रांस यूरोप का पहला देश बना जिसने UPI अपनाया — यह फरवरी 2024 में Lyra Network के साथ साझेदारी से शुरू हुआ। NPCI अब मलेशिया, थाईलैंड और जापान में भी विस्तार की तैयारी में है, जो भारतीय पर्यटकों के लिए उभरती हुई पसंदीदा मंज़िलें हैं।

यह विस्तार महज़ सुविधा की बात — एक साधारण पेमेंट ऐप अब एक ज़िंदा इकोसिस्टम बन चुका है।

यह वैश्विक विस्तार केवल भारतीय पर्यटकों और प्रवासियों की सुविधा के लिए नहीं है — यह भारत को डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करता है। क्रॉस-बॉर्डर UPI ट्रांज़ैक्शन FY25 में 7.55 लाख तक पहुँच गए — यानी FY24 के मुकाबले 20 गुना की बढ़ोतरी।

हालांकि एक ज़मीनी हकीकत भी जाननी ज़रूरी है — प्रेस रिलीज़ में UPI के दर्जन भर देशों में काम करने का दावा होता है, लेकिन व्यवहार में यह सिर्फ तीन-चार देशों में ही भरोसेमंद तरीके से काम करता है। बाकी जगहों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तो है, पर मर्चेंट की तैयारी और ट्रेनिंग अभी पीछे है।

आगे का रास्ता — UPI 3.0 की दुनिया

UPI का अगला अध्याय और भी रोमांचक है। NPCI ने Global Fintech Fest 2026 में 10 सितंबर 2026 को UPI Tap & Pay और AI-संचालित MyUPI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। अब NFC-इनेबल्ड फोन से आप बिल्कुल कॉन्टेक्टलेस कार्ड की तरह टैप करके UPI से पेमेंट कर सकते हैं — बशर्ते POS टर्मिनल compatible हो।

Credit की दुनिया में भी UPI एक बड़ा बदलाव ला रहा है। UPI पर क्रेडिट लाइन एक प्री-अप्रूव्ड लोन है जिसे बैंक द्वारा एक्टिवेट होने के बाद सीधे किसी भी UPI ऐप से इस्तेमाल किया जा सकता है — यह फीचर ग्राहकों को प्री-अप्रूव्ड उधार सीमा तक आसान और झंझट-मुक्त क्रेडिट एक्सेस देता है। जैसे-जैसे यूज़र का व्यवहार UPI-फर्स्ट होता जा रहा है, क्रेडिट की यह सुविधा लाखों उन लोगों तक पहुँच सकती है जिनके पास अब तक क्रेडिट कार्ड नहीं था।

इसके अलावा UPI Lite का विस्तार हो रहा है — यह एक ऑफलाइन-फर्स्ट फीचर है जो बिना इंटरनेट कनेक्शन के भी छोटे पेमेंट करने देता है। यह ख़ासतौर पर उन इलाकों के लिए गेम-चेंजर है जहाँ नेटवर्क कनेक्टिविटी अभी भी कमज़ोर है।

एक और बड़ा बदलाव आ रहा है — UPI One World, जो विदेशी नागरिकों और पर्यटकों को भारत में बिना भारतीय बैंक अकाउंट के UPI से पेमेंट करने देगा। G20 और बड़े इंटरनेशनल इवेंट्स के दौरान यह फीचर पहले ही पायलट किया जा चुका है।

निष्कर्ष — एक आइडिया जिसने देश को बदल दिया

10 साल पहले UPI एक साहसी प्रयोग था — एक ऐसे देश में जहाँ बहुत बड़ी आबादी के पास न क्रेडिट कार्ड था, न स्मार्टफोन, और न भरोसेमंद इंटरनेट। आज वही देश दुनिया के रियल-टाइम पेमेंट का आधा हिस्सा अकेले संभालता है।

UPI की कहानी सिर्फ टेक्नोलॉजी की कहानी नहीं है — यह भरोसे की कहानी है। उस सब्ज़ीवाले का भरोसा जिसने पहली बार QR कोड लगाया, उस छात्र का भरोसा जिसने पहली बार ऑनलाइन फीस भरी, और उस बुज़ुर्ग का भरोसा जिसने बेटे को दूसरे शहर पैसे भेजे — बिना बैंक जाए।

अगले 10 साल में UPI और कहाँ तक जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन एक बात तय है — यह सफ़र अभी ख़त्म नहीं हुआ, बल्कि अभी तो यह रफ़्तार पकड़ रहा है।

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