पटना के तीन छुपे हुए ख़ज़ाने: Jalan Museum, Begu Hajjam Mosque और Kumhrar की अनकही दास्तान

पटना के तीन अनदेखे ऐतिहासिक स्थल — Jalan Museum, Begu Hajjam Mosque और Kumhrar — जिनकी कहानियाँ tourists की नज़र से अक्सर ओझल रह जाती हैं।

मनोरंजन (ENTERTAINMENT)

9/17/20261 मिनट पढ़ें

पटना का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग में गोलघर, पटना साहिब गुरुद्वारा या पटना म्यूज़ियम आ जाता है। लेकिन इस शहर की गलियों में कुछ ऐसे ख़ज़ाने भी दबे हैं, जिन्हें देखने बहुत कम लोग पहुँचते हैं। बात करें Napoleon III के पलंग की, या फिर उस मस्जिद की जिसे एक नाई ने अपना नाम दिया, या उस ज़मीन की जहाँ कभी सम्राट अशोक की सभा हुआ करती थी — तो यकीन मानिए, पटना की ये तीन जगहें किसी बड़े सफर से कम नहीं। आइए इन तीनों की अनकही कहानियाँ सुनते हैं।

Jalan Museum: एक ज़िंदा घर, जो म्यूज़ियम भी है

जलान म्यूज़ियम, जिसे स्थानीय लोग "क़िला हाउस" भी कहते हैं, गंगा के किनारे पटना सिटी इलाके में बसा एक निजी संग्रहालय है। यह जगह इसलिए भी ख़ास है क्योंकि यह बिहार के केवल दो निजी संग्रहालयों में से एक है।

इस म्यूज़ियम की नींव 1919 में दीवान बहादुर राधा कृष्ण जलान ने रखी थी। वो महज़ एक संग्रहकर्ता नहीं, बल्कि एक जुनूनी इंसान थे। अपने छह महीने के यूरोप दौरे से लौटते वक्त वो तीन वैगन भरकर अनमोल पुरावशेष और कलाकृतियाँ ले आए थे।यहाँ से लेख जारी है:

इस म्यूज़ियम में 10,000 से ज़्यादा कलाकृतियाँ हैं — King Henry II के लिए बनाई गई कटलरी कैबिनेट, Napoleon III का four-poster बेड, टीपू सुल्तान की हाथीदाँत की पालकी, King George III का डिनर सेट, 200 साल पुराने फ़ारसी कालीन, 200 ईसा पूर्व के चीनी जेड, मुग़ल फिलिग्री और 7वीं सदी की चीनी मूर्तियाँ।

एक दिलचस्प किस्सा यह भी है कि दीवान बहादुर राधा कृष्ण जलान ने मिस्र की ममियाँ भी लाई थीं, लेकिन उनकी पत्नी गिग्या बाई ने घर में खाना खाने से इनकार कर दिया — जब तक ममियाँ घर से नहीं निकलतीं! नतीजतन उन्हें एक सरकारी संग्रहालय को दान में दे दिया गया। और अगर आप celadon plates का संग्रह देखें, तो कहा जाता है कि ये प्लेटें ज़हरीला खाना परोसे जाने पर रंग बदल लेती थीं या टूट जाती थीं!

लेकिन एक ज़रूरी बात — यह म्यूज़ियम 2020 में परिवार के आंतरिक विवाद के कारण बंद हो गया था, और इसके हॉल अभी भी बंद हैं। इसलिए जाने से पहले परिवार से संपर्क ज़रूर करें और स्थिति जाँच लें।

Begu Hajjam Mosque: जब एक नाई ने इतिहास में जगह बनाई

पटना की पुरानी गलियों में, खवाजा कलन घाट रोड पर एक ऐसी मस्जिद है जो पटना की सबसे पुरानी मस्जिद होने का दर्जा रखती है — और इसका नाम है Begu Hajjam Mosque। यह मस्जिद खाजे कलन घाट के पूर्वी किनारे पर स्थित है और पटना की सबसे पुरानी मस्जिद होने का गौरव रखती है।

यह मस्जिद सन् 1489 में हुसैनी वंश के संस्थापक, अलाउद्दीन हुसैन शाह के आदेश पर बनवाई गई थी। बाद में इसे Khan Muazzam Nazir Khan ने गौर के अलायहाँ से लेख जारी है:

उद दौर के सुल्तान के आदेश पर बनवाया गया था। यह मस्जिद 1509 ई. में खान मुअज़्ज़म नज़ीर खान ने गौर के सुल्तान अलाउद्दीन शाह के शासनकाल में बनवाई थी — और बाद में इसे "बेगू हज्जाम" नाम के एक नाई ने जीर्णोद्धार कराया। इसी वजह से इस मस्जिद को उस नाई का नाम मिल गया, जो इतिहास में बड़े-बड़े राजाओं से ज़्यादा याद रखा गया।

इस मस्जिद की सबसे खास पहचान इसके चमकीले glazed tiles हैं, जो उस दौर में गौर में बहुत लोकप्रिय थे। और दरवाज़े पर की गई बारीक नक्काशी इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाती है। मस्जिद की एक दीवार पर इसके निर्माण का पूरा विवरण शिलालेख में दर्ज है।

देश की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक होने के नाते बेगू हज्जाम मस्जिद अलग-अलग कोनों से श्रद्धालुओं को खींचती है। यह मस्जिद पुराने पटना के Khwaja Kalan Road पर आज भी ज़िंदा इतिहास की तरह खड़ी है और शहर की धार्मिक विविधता का प्रतीक है।

Kumhrar Archaeological Site: जहाँ अशोक की सभा हुई थी

अगर आप पटना में किसी एक ऐसी जगह को महसूस करना चाहते हैं जो सचमुच समय को पीछे खींच ले जाए — तो वो जगह है Kumhrar। पटना जंक्शन से महज़ पाँच किलोमीटर दूर, कंकड़बाग रोड पर।

Kumhrar Park एक पुरातत्व स्थल है जो मौर्य साम्राज्य की प्राचीन राजधानी पाटलिपुत्र के अवशेषों को समेटे हुए है। यहाँ मिले सिक्कों, मुहरों और मूर्तियों की dating से पता चला है कि Kumhrar मौर्य काल से लेकर 600 ई. तक लगातार आबाद रहा। पटना का पुराना नाम पाटलिपुत्र था, जिसका इतिहास 600 ई.पू. तक जाता है।यहाँ से लेख जारी है:

यहाँ खोजा गया 80 खंभों का वो विशाल सभागार, जो चुनार के पॉलिश्ड बलुआ पत्थर से बना था — हर खंभा लगभग 32 फुट ऊँचा — और पूरा हॉल करीब 39 गुणा 32 मीटर के दायरे में फैला था। सम्राट अशोक (268–232 ई.पू.) ने इसी हॉल में तीसरी बौद्ध संगीति बुलाई थी, जिसका मकसद बिखरे हुए बौद्ध संघ को एकजुट करना और धम्म का प्रसार करना था। यह घटना बौद्ध धर्म को एक वैश्विक धर्म का रूप देने में बेहद अहम रही।

इन खंभों को पूर्व-पश्चिम में 10 और उत्तर-दक्षिण में 8 की समानांतर कतारों में लगाया गया था, और हर दो खंभों के बीच लगभग 15 फुट की दूरी थी। सभी खंभे उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर ज़िले के चुनार से लाए गए बलुआ पत्थर के थे — एकाश्म (monolith), और मौर्यकालीन चमक से लिपटे हुए।

अब एक दिलचस्प सवाल — अगर ये खंभे इतने शानदार हैं, तो आज दिखते क्यों नहीं? 2004-2005 में बढ़ते भूजल स्तर की वजह से साइट का एक हिस्सा डूब गया, और ASI ने खंभों को बचाने के लिए उन्हें मिट्टी से ढक दिया — यह सोच कि "अगर संरक्षित नहीं कर सकते, तो कम से कम preserve करो।" लेकिन अच्छी खबर यह है कि पटना में भूजल स्तर पिछले दो दशकों में काफी कम हो गया है, जिससे अब इस साइट को फिर से खोलने में दिलचस्पी जगी है।

एक और रोचक बात — किंवदंती है कि Kumhrar में "आरोग्य विहार" नामक एक प्राचीन मठ-अस्पताल भी था, जिसे खुद धन्वंतरि ने चलाया था। यानी यह ज़मीन सिर्फ राजनीति की नहीं, बल्कि चिकित्सा केयहाँ से लेख जारी है:

इतिहास की भी साक्षी रही है। हालाँकि इस किंवदंती की पुरातात्विक पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हुई है, लेकिन यहाँ मिले टेराकोटा के बर्तन और चिकित्सा-संबंधी अवशेष इस बात को पूरी तरह नकारते भी नहीं।

Kumhrar में एक छोटा लेकिन बेहद सुव्यवस्थित Museum भी है, जहाँ खुदाई में मिली मूर्तियाँ, मुहरें, सिक्के और रोज़मर्रा की चीज़ें रखी हुई हैं। यहाँ रखी यक्षी की एक पॉलिश्ड मूर्ति मौर्यकालीन शिल्प का बेहतरीन नमूना है। पार्क के अंदर एक Arogya Vihar Complex भी बनाया गया है जो पर्यटकों को उस प्राचीन मठ के बारे में जानकारी देता है। साइट आमतौर पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहती है, और प्रवेश शुल्क बेहद मामूली है।

इन तीनों जगहों पर जाते वक्त ये बातें याद रखें

अगर आप इन तीनों जगहों की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ व्यावहारिक बातें ज़रूर ध्यान में रखें।

Jalan Museum के लिए पहले से संपर्क करना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यह एक निजी संग्रहालय है और फिलहाल इसके खुलने की स्थिति अनिश्चित है। जाने से पहले स्थानीय पर्यटन कार्यालय या Bihar Tourism के ज़रिए जानकारी लें।

Begu Hajjam Mosque एक ज़िंदा इबादतगाह है, इसलिए नमाज़ के वक्त के दौरान visit करने से बचें। कपड़े शालीन रखें और अंदर जाने से पहले जूते ज़रूर उतारें। यहाँ की तंग गलियों में ऑटो या रिक्शा सबसे सही रहता है।

Kumhrar के लिए सुबह जल्दी जाना सबसे अच्छा रहता है — धूप कम होती है और पार्क में भीड़ भी नहीं होती। अगर आप खुदाई के बारे में गहराई से समझना चाहते हैं, तो वहाँ मौजूद गाइड से बात करें — वो कुछ ऐसी किस्से सुनाते हैं जो किसी किताब में नहीं मिलतीं।

तीनों जगहें एक ही दिन में घूमी जा सकती हैं अगर आप सुबह 8 बजे निकलयहाँ से लेख जारी है:

जाएं। पहले Kumhrar, फिर Begu Hajjam Mosque, और आख़िर में Jalan Museum — यह क्रम समय और दूरी दोनों लिहाज़ से सबसे सही रहता है। Kumhrar से Begu Hajjam Mosque की दूरी करीब 8-9 किलोमीटर है, और वहाँ से Jalan Museum (क़िला हाउस) महज़ 2-3 किलोमीटर दूर है। यानी तीनों जगहें एक ही पट्टे में आती हैं।

खाने-पीने के लिए पुराने पटना की गलियों में बहुत कुछ मिलेगा — लिट्टी-चोखा, सत्तू का शरबत और मालपुआ इस इलाके की पहचान हैं। भरपेट खाइए, क्योंकि इतिहास घूमने में ऊर्जा खूब लगती है।

निष्कर्ष: पटना को एक और नज़र से देखिए

पटना अक्सर transit city की तरह देखा जाता है — लोग बोधगया या राजगीर जाने के लिए यहाँ रुकते हैं और अगले दिन निकल लेते हैं। लेकिन जो लोग इस शहर की परतें उधेड़ने की कोशिश करते हैं, उन्हें पता चलता है कि पटना खुद एक पूरी यात्रा है।

एक नाई की मस्जिद, एक ज़िंदा म्यूज़ियम जिसमें Napoleon का बेड है, और वो ज़मीन जहाँ अशोक ने बौद्ध धर्म को नई दिशा दी — ये तीनों मिलकर बताते हैं कि पटना सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि सदियों की कहानियों का एक जीवित दस्तावेज़ है।

तो अगली बार जब पटना जाएं, तो गोलघर की तस्वीर के बाद थोड़ा वक्त इन छुपे हुए ख़ज़ानों को भी दीजिए। यकीन मानिए, ये जगहें आपको निराश नहीं करेंगी — बल्कि एक ऐसी याद देंगी जो किसी टूरिस्ट गाइड में नहीं मिलती।

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