CTET 2026 नया परीक्षा पैटर्न: क्या बदला, क्या रहा वही — पूरी जानकारी एक जगह

CTET 2026 के नए परीक्षा पैटर्न में क्या बदलाव आए हैं? सिलेबस, पेपर स्ट्रक्चर और तैयारी की पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

शिक्षा (EDUCATION)

9/1/20261 मिनट पढ़ें

अगर आप टीचर बनने का सपना देख रहे हैं और CTET की तैयारी कर रहे हैं, तो आपने ज़रूर सुना होगा कि 2026 में इसके पैटर्न में कुछ बदलाव होने वाले हैं या हो चुके हैं। ऐसे में सबसे पहला सवाल जो दिमाग में आता है वो यह है — "भाई, अब पढ़ना क्या है और कैसे पढ़ना है?" यही सवाल है जिसका जवाब आज हम इस लेख में देने की कोशिश करेंगे — बिल्कुल साफ और सीधी भाषा में।

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CTET है क्या और यह ज़रूरी क्यों है?

CTET यानी Central Teacher Eligibility Test — यह वो परीक्षा है जो CBSE, केंद्रीय विद्यालय (KV), नवोदय विद्यालय और कई दूसरे केंद्र सरकार के स्कूलों में पढ़ाने के लिए ज़रूरी है। इसे पास किए बिना आप इन स्कूलों में नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते।

CTET में दो पेपर होते हैं:

पेपर 1 — जो लोग कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाना चाहते हैं उनके लिए। पेपर 2 — जो लोग कक्षा 6 से 8 तक पढ़ाना चाहते हैं उनके लिए।

आप चाहें तो दोनों पेपर एक साथ भी दे सकते हैं। CTET का सर्टिफिकेट अब आजीवन (Lifetime) के लिए मान्य है — पहले यह सिर्फ 7 साल के लिए होता था, जिसे सरकार ने बाद में बदल दिया।

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2026 में पैटर्न में क्या बदला है?

यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है, इसलिए ध्यान से पढ़ें।

CBSE और शिक्षा मंत्रालय की तरफ से CTET के ढांचे में NEP 2020 (National Education Policy) के असर को धीरे-धीरे शामिल किया जा रहा है। आइए समझते हैं कि असल में क्या-क्या बदला है और क्या अभी भी पहले जैसा है।

जो चीज़ें पहले जैसी हैं:

दोनों पेपर में अभी भी 150 सवाल होते हैं और कुल 150 नंबर होते हैं। हर सवाल 1 नंबर का है और कोई नेगेटिव मार्किंग नहीं है — यानी गलत जवाब देने पर नंबर नहीं कटेंगे। परीक्षा का समय ढाई घंटे (150 मिनट) ही रहता है। पास होने के लिए सामान्य वर्ग को 60% यानी 90 नंबर और आरक्षित वर्ग को 55% यानी 82-83 नंबर लाने होते हैं।

जो बदला है या बदलने की दिशा में है:

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब सवालों का झुकाव रटने वाली जानकारी से हटकर समझ और व्यावहारिक सोच की तरफ हो रहा है। इसे आसान भाषा में कहें तो — पहले पूछा जाता था "यह नियम क्या है?", अब पूछा जाता है "इस परिस्थिति में एक अच्छा टीचर क्या करेगा?"

बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (Child Development and Pedagogy) वाले हिस्से में NCF 2022 और NEP 2020 के विचारों पर आधारित सवाल अब ज़्यादा देखने को मिल रहे हैं। इसमें समावेशी शिक्षा (Inclusive Education), बच्चों की सीखने की अलग-अलग शैलियां, और मूल्यांकन के नए तरीके जैसे विषय अब ज़्यादा अहम हो गए हैं।

भाषा वाले सेक्शन में comprehension यानी गद्यांश पर आधारित सवालों की संख्या पहले से थोड़ी बढ़ी है, जिससे यह परखा जा सके कि उम्मीदवार भाषा को समझकर पढ़ा सकते हैं या सिर्फ व्याकरण के नियम याद किए हैं।

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पेपर 1 और पेपर 2 का विस्तृत ढांचा

पेपर 1 (कक्षा 1-5 के लिए):

इसमें पांच हिस्से होते हैं। बाल विकास और शिक्षाशास्त्र से 30 सवाल, भाषा 1 (हिंदी या कोई अन्य चुनी हुई भाषा) से 30 सवाल, भाषा 2 (आमतौर पर अंग्रेज़ी) से 30 सवाल, गणित से 30 सवाल, और पर्यावरण अध्ययन (EVS) से 30 सवाल। कुल मिलाकर 150 सवाल और 150 नंबर।

पेपर 2 (कक्षा 6-8 के लिए):

इसमें भी पांच हिस्से हैं। बाल विकास और शिक्षाशास्त्र से 30 सवाल, भाषा 1 से 30 सवाल, भाषा 2 से 30 सवाल — यहां तक पेपर 1 जैसा ही है। लेकिन आगे फर्क आता है — चौथा और पांचवां हिस्सा आपके विषय पर निर्भर करता है। अगर आप गणित या विज्ञान पढ़ाना चाहते हैं तो उन दोनों विषयों से मिलाकर 60 सवाल आएंगे। अगर आप सामाजिक विज्ञान (Social Science) पढ़ाना चाहते हैं तो उससे 60 सवाल होंगे। और अगर आप भाषा विषय चुनते हैं तो उस भाषा से जुड़े 60 सवाल होंगे।

यह चुनाव आवेदन करते वक्त ही करना होता है, इसलिए पहले से तय कर लें कि आप कौन सा विषय पढ़ाना चाहते हैं।

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तैयारी कैसे करें — असली और काम की बातें

अब बात करते हैं उस हिस्से की जो सबसे ज़्यादा मायने रखता है — यानी तैयारी की रणनीति।

बाल विकास और शिक्षाशास्त्र को हल्के में मत लें।

बहुत सारे उम्मीदवार इस सेक्शन को "आसान" समझकर कम वक्त देते हैं और यहीं से नंबर गंवाते हैं। पियाजे, वाइगोत्स्की, कोहलबर्ग जैसे विद्वानों के सिद्धांत सिर्फ याद करने से काम नहीं चलेगा — आपको यह समझना होगा कि क्लासरूम में ये सिद्धांत कैसे काम करते हैं। नए पैटर्न में परिस्थिति आधारित (scenario-based) सवाल बढ़े हैं, जिनमें एक कहानी दी जाती है और पूछा जाता है कि टीचर को क्या करना चाहिए।

भाषा के दोनों सेक्शन में comprehension पर फोकस करें।

रोज़ाना एक-दो गद्यांश पढ़ने और उन पर सवाल हल करने की आदत डालें। व्याकरण के नियम ज़रूर पढ़ें, लेकिन comprehension की प्रैक्टिस उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है।

विषय ज्ञान (Content Knowledge) में गहराई रखें।

पेपर 2 में खासतौर पर — अगर आप गणित-विज्ञान या सामाजिक विज्ञान चुन रहे हैं, तो NCERT की कक्षा 6 से 8 तक की किताबें आपकी सबसे अच्छी दोस्त हैं। इन्हें ध्यान से पढ़ें क्योंकि CTET के ज़्यादातर विषय संबंधी सवाल इन्हीं किताबों की अवधारणाओं पर आधारित होते हैं। बाहर से महंगी कोचिंग की किताबें खरीदने से पहले NCERT पूरी कर लें।

पुराने पेपर हल करना सबसे ज़रूरी काम है।

CTET के पिछले कई सालों के प्रश्नपत्र CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर मुफ्त में मिलते हैं। इन्हें टाइमर लगाकर हल करें — यानी ठीक ढाई घंटे में। इससे आपको अंदाज़ा होगा कि समय कहां ज़्यादा लग रहा है और किस सेक्शन पर और मेहनत चाहिए। साथ ही सवालों का तरीका और भाषा भी समझ आती है।

मॉक टेस्ट और रिवीज़न का शेड्यूल बनाएं।

तैयारी के आखिरी एक महीने में हर हफ्ते कम से कम दो फुल-लेंथ मॉक टेस्ट दें। गलत हुए सवालों को एक अलग नोटबुक में लिखें और हर हफ्ते उन्हें दोबारा देखें। यह छोटी सी आदत बहुत बड़ा फर्क करती है।

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निष्कर्ष

CTET 2026 का पैटर्न भले ही पूरी तरह नया न हो, लेकिन उसकी दिशा साफ है — अब सिर्फ याद करने वाले टीचर नहीं, बल्कि सोचने और समझाने वाले टीचर चाहिए। अगर आप इस बदलाव को समझकर तैयारी करें, तो न सिर्फ परीक्षा पास होगी बल्कि आप एक बेहतर टीचर भी बनेंगे।

NCERT पढ़ें, पुराने पेपर हल करें, और बाल विकास को गंभीरता से लें — बस यही तीन काम आपकी तैयारी की नींव हैं। शुभकामनाएं!

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