बिहार के वो छुपे पहाड़ी ठिकाने जिन्हें कम लोग जानते हैं — Brahmajuni, Ramshila, Pretshila और Gurpa Peak

बिहार में पहाड़? जी हाँ! Brahmajuni Hill, Ramshila, Pretshila और Gurpa Peak — गया के ये पहाड़ी ठिकाने इतिहास, रोमांच और सुकून का अनोखा मेल हैं।

शिक्षा (EDUCATION)

9/17/20261 मिनट पढ़ें

बिहार का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के दिमाग में बोधगया, नालंदा या पटना आता है। पहाड़ों का ख्याल? वो शायद किसी को नहीं आता। लेकिन सच ये है कि गया जिले के आस-पास कुछ ऐसे पहाड़ी ठिकाने छुपे हैं जो न सिर्फ इतिहास से भरपूर हैं, बल्कि ट्रेकिंग का मज़ा, शानदार नज़ारे और गहरी आध्यात्मिक शांति भी देते हैं। ये वो जगहें हैं जिनका नाम बड़े ट्रैवल मैगज़ीन में नहीं छपता, पर जो इन्हें एक बार देख लेते हैं, वो बार-बार लौटना चाहते हैं।

तो चलिए, आज इन्हीं चार असली पहाड़ी ठिकानों की सैर करते हैं।

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Brahmajuni Hill — हज़ार सीढ़ियों वाली पवित्र चढ़ाई

Brahmajuni Hill, जिसे Brahmayoni भी कहते हैं, गया जिले में स्थित है। यह विष्णुपद मंदिर से महज़ 1 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है। देखने में यह पहाड़ी साधारण लग सकती है, लेकिन इसके ऊपर चढ़ने का अनुभव बिल्कुल अलग है।

Brahmajuni की चोटी तक पहुँचना आसान नहीं है — करीब एक हज़ार पत्थर की सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। पर हर सीढ़ी के साथ गया शहर का नज़ारा और भी शानदार होता जाता है।

ऊपर पहुँचोटी पर पहुँचते ही सामने दिखती है अष्टभुजा देवी का मंदिर और दो संकरी गुफाएं — Brahmayoni और Maitreyiyoni नाम की ये गुफाएं इस पहाड़ी की खासियत हैं। Brahmayoni गुफा के अंदर एक छोटे से मंदिर में ब्रह्मा की पाँच सिरों वाली मूर्ति स्थापित है।

हिंदू मान्यता के अनुसार यही वो जगह है जहाँ भगवान विष्णु ने राक्षस गयासुर को परास्त किया था। और दिलचस्प बात ये है कि बौद्ध परंपरा में यह भी माना जाता है कि बुद्ध ने यहाँ एक हज़ार शिष्यों को अपना प्रसिद्ध "अग्नि प्रवचन" दिया था। यानी यह पहाड़ी एक साथ दो महान धर्मों की यादें अपने भीतर समेटे हुए है।

Brahmajuni आने का सबसे अच्छा समय सितंबर से मार्च के बीच का है, जब मौसम चढ़ाई के लिए सुकूनदेह होता है।

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Ramshila Hill — राम के पैरों के निशान जहाँ मिलते हैं

Ramshila Hill, यानी 'राम की चट्टान', गया शहर से करीब 5 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। मान्यता है कि यही वो पहली जगह है जहाँ भगवान राम ने फल्गु नदी की रेत से अपने पिता राजा दशरथ के लिए पिंडदान किया था — सीता की अनुपस्थिति में।

चोटी तक पहुँचने के लिए 376 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। लेकिन हर सीढ़ी के साथ नीचे फैला हरा-भरा नज़ारा आपको थकान भुला देता है। यह विश्वास किया जाता है कि सच्चे मन से आने वाले भक्त को यहाँ राम के पैरों के निशान (रामपद) दिखते हैं। मंदिर परिसर में एक तालाब और शिव मंदिर भी है जहाँ कुछ शांत पल बिताए जा सकते हैं।

पहाड़ी पर 18वीं सदी में रानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा बनवाया गया मंदिर आज भी खड़ा है और इसकी शिल्पकारी देखते ही बनती है। पितृपक्ष के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन अगर आप सुकून की तलाश में हैं तो किसी सामान्य दिन सुबह जल्दी आना बेहतर रहेगा।

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Pretshila Hill — वो पहाड़ जहाँ आत्माओं की मुक्ति होती है

तीनों पहाड़ियों में सबसे कम चर्चित, लेकिन शायद सबसे रहस्यमयी है Pretshila Hill। इसका नाम ही बताता है कि यह जगह "प्रेत" यानी मृत आत्माओं से जुड़ी है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि गया में पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्माओं को मोक्ष मिलता है, और Pretshila इसी मोक्ष की यात्रा का एक अहम पड़ाव है।

यह पहाड़ी भी गया के दक्षिण में स्थित है और यहाँ चढ़ने के लिए पगडंडियाँ हैं जो जंगल के बीच से गुज़रती हैं। Ramshila की चमक-दमक से अलग, Pretshila ज़्यादा एकांत और शांत है। इसीलिए जो लोग भीड़-भाड़ से दूर रहना चाहते हैं, उनके लिए यह एक परफेक्ट जगह है।

चोटी पर पहुँचकर जो 360 डिग्री का नज़ारा मिलता है — एक तरफ गया शहर, दूसरी तरफ हरियाली से ढके पहाड़ — वो किसी के भी मन को ताज़ा कर देता है। यहाँ का माहौल इतना शांत है कि लोग ध्यान और प्राणायाम के लिए भी इस जगह को चुनते हैं।

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Gurpa Peak — बिहार का सबसे अनजान ट्रेकिंग स्पॉट

अगर आप थोड़े ज़्यादा एडवेंचर के शौकीन हैं, तो Gurpa Peak आपके लिए है। गया जिले में ही स्थित यह पहाड़ी बिहार की सबसे कम जानी-पहचानी ट्रेकिंग डेस्टिनेशन में से एक है।

Gurpa का बौद्ध इतिहास बेहद गहरा है। यहाँ एक गुफा है जिसके बारे में कहा जाता है कि महाकाश्यप — भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों में से एक — यहाँ ध्यानस्थ अवस्था में विराजमान हैं। बौद्ध परंपरा केअनुसार वे मैत्रेय बुद्ध के आगमन तक यहाँ समाधि में हैं। यही वजह है कि यह जगह श्रीलंका, थाईलैंड, जापान और म्यांमार जैसे देशों के बौद्ध तीर्थयात्रियों के लिए खास महत्व रखती है।

ट्रेकिंग के नज़रिए से देखें तो Gurpa Peak की चढ़ाई बाकी तीनों पहाड़ियों से ज़्यादा चुनौतीपूर्ण है। रास्ता कच्चा है, घनी झाड़ियाँ हैं और कोई बड़ी सुविधा नहीं है — लेकिन यही इसकी असली खूबसूरती भी है। ऊपर पहुँचने पर जो जंगली एकांत और पहाड़ी हवा मिलती है, वो किसी रिसॉर्ट में नहीं मिल सकती।

Gurpa गाँव तक पहुँचने के लिए गया से बस या ऑटो आसानी से मिल जाते हैं, और वहाँ से पहाड़ी की तलहटी तक पैदल जाना पड़ता है। अगर आप जा रहे हैं तो साथ में पानी की बोतल, अच्छे जूते और थोड़ा नाश्ता ज़रूर रखें — रास्ते में कोई दुकान नहीं मिलेगी।

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इन पहाड़ियों तक कैसे पहुँचें और क्या ध्यान रखें

इन चारों जगहों का बेस पॉइंट गया शहर है। गया, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और पटना से सीधे ट्रेन और फ्लाइट से जुड़ा हुआ है। गया एयरपोर्ट और गया जंक्शन दोनों अच्छे विकल्प हैं।

गया पहुँचने के बाद इन पहाड़ियों तक जाने के लिए ऑटो, ई-रिक्शा या किराए की बाइक सबसे सुविधाजनक रहती है। Brahmajuni और Ramshila तो शहर के काफी नज़दीक हैं, जबकि Pretshila और Gurpa के लिए थोड़ा ज़्यादा वक्त चाहिए।

कुछ ज़रूरी बातें जो आपके काम आएंगी:

सुबह जल्दी निकलें — धूप चढ़ने से पहले पहाड़ी पर पहुँचना बेहतर है, खासकर गर्मियों में। पितृपक्ष (आमतौर पर सितंबर-अक्टूबर) के दौरान गया में लाखों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए उस समय होटल बुकिंग पहले से करना ज़रूरी है। पहाड़ी पर प्लास्टिक और कूड़ान फेंकें — ये जगहें धार्मिक और प्राकृतिक दोनों दृष्टि से संवेदनशील हैं। मंदिरों में प्रवेश के दौरान पोशाक का ध्यान रखें और स्थानीय नियमों का सम्मान करें। अकेले ट्रेक पर जाने से बचें, खासकर Gurpa और Pretshila पर — किसी साथी को साथ ले जाना बेहतर है।

ठहरने के लिए गया में हर बजट के होटल मौजूद हैं। बोधगया में भी कई अच्छे गेस्टहाउस हैं जो गया से सिर्फ 13 किलोमीटर दूर हैं और वहाँ से इन पहाड़ियों पर दिन की ट्रिप आराम से हो सकती है।

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निष्कर्ष — बिहार को नए नज़रिए से देखो

हम अक्सर बिहार को सिर्फ इतिहास और धर्म की नज़र से देखते हैं, लेकिन ये चार पहाड़ी ठिकाने बताते हैं कि इस राज्य में रोमांच, एकांत और कुदरती खूबसूरती भी कम नहीं है। Brahmajuni की हज़ार सीढ़ियाँ, Ramshila की पौराणिक कहानियाँ, Pretshila का गहरा सन्नाटा और Gurpa Peak की जंगली चुनौती — हर पहाड़ी का अपना एक अलग मिज़ाज है।

अगली बार जब बोधगया या गया का प्लान बनाएं, तो इन पहाड़ियों को भी अपनी लिस्ट में ज़रूर जोड़ें। शायद ये वो सफर बन जाए जो आपको सबसे ज़्यादा याद रहे — इसलिए नहीं कि यह मशहूर था, बल्कि इसलिए कि यह सिर्फ आपका अपना अनुभव था।

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